नासूर (Anal Fistula): Causes & treatment हिंदी मे



नासूर (Anal Fistula) फिस्ट्युला का अर्थ बांसुरी ऐसा होता हैं। बांसुरी मतलब दूसरे बाजु से बाहर निकलने के मार्ग मे रहने वाले अन्य छेद। यानि गुदामार्ग के सिवाय एक ऐसा नया रास्ता जो पाइपलाइन के जैसे गुदामार्ग से निकल के छेद के रूप में त्वचाकेबाहर निकलता है। यह नए मार्ग की पाइपलाइन अंदर के त्वचासे ढके हुए से रहते है। कई बार उसमे ज्यादा उलझन रहती हैं। यानि एक ही समय एक से भी ज्यादा रास्तों का निर्माण होता है, या इसी एक मार्ग से बाहर खुलने वाले एक से ज्यादा छेद रहते हैं। और ऐसा क्यों होता हैं, ये जानने के लिए हमारे पाचक प्रक्रिया के निचली बगल की शारीरिक रचना कैसी होती हे ये जानते हैं।


गुदामार्ग के अंदर की पकड़ के पायदान में मलाशय रहता हैं, (साधारण ४-८ मलाशय ग्रंथी). इन ग्रंथियों के मुंह इन पायदानों के उपरी भाग में खुलते हैं। गुदाग्रंथी याने मलाशय का शरीर में क्या कार्य होगा, इसकी जानकारी नहीं हैं फीर भी इनस्थानो के वजह से संक्रमण होने की ज्यादा सम्भावनाये होती हैं।


नासूर कैसे निर्माण होता हैं?

गुदाग्रंथी को हुआ संक्रमण आजुबाजू फैलता है, और गुदद्वार पे फोड़ा तैयार होता हैं. एक या अनेक फोड़ा गुदद्वार के त्वचा पर फट जाता हैं और एक मार्ग का निर्माण होता हैं. इसीको नासूर कहते हैं। इस मार्ग का अंतरमुख गुदाशय में होता हैं और बाहरीद्वार गुदाद्वार के त्वचा पर होता है।

गुदामार्ग हर एक को होता हैं,और गूदाग्रंथी (मलाशय) भी इस मार्ग के पायदानों में होती है, तो फिर संक्रमण के वजह से नासूर कम लोगोंको ही क्यों होता हैं? ऐसे अनेक प्रश्न हमारे मन में सहज ज्ञान युक्त होते हैं। उसका सरल रूप से उत्तर दिया जाये तो, शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति कम होने की ये बाहरीरूप से लक्षण हो सकता हैं।

आइये चलिए देखते हैं नासूर होने के क्या-क्या कारन हो सकते हैं.

  • गुदद्वार, गुदामार्ग या गुदाग्रंथी (मलाशय) में होने वाला फोड़ा,फोड़ा फट जाना। फोड़े का खुला हुआ मुह खुला का खुला रह जाना, उसपर कोई उपाय न करना।

  • मछली की हड्डी, अंडे के छिलके उस जगह पर चुभना।

  • Fissure के दरारों में संक्रमण होके नासूर की शुरुवात होना। यक्ष्मबाधा का रोगी जब जीवाणूयुक्त थूक निगलनेपे, आंतों में भी यक्ष्मबाधा होने की सम्भावना की जाती हैं। और उसके गुदामार्ग में फोड़ा निर्माण होता हैं। (बेशक, इस प्रकार के फोड़े बहुत दुर्लभ हैं)


बड़ी आंत की सूजन (Ulcerative Colitis) का फोड़ा में परिवर्तन होके नासूर हो सकता हैं। नासूर का प्रमाण सामान्य रूप में महिलाओंसे ५% ज्यादा पुरुषों में पाया जाता हैं।


नासूर के लक्षण क्या हैं?

  • गुदद्वार के पास या गुदामार्ग में अंदर से फोड़ा आता है। उस समय "दर्द" ये लक्षण ज्यादा दीखता है, और उसमेसे मवाद गिरने के बाद दर्द हल्का सा कम होता है।

  • रोगीको यक्ष्मबाधा की पुराणी बीमारी हो सकती हैं।

  • जाँच दौरान गुदद्वार के आजु बाजु मैं बहोत से छेद हो सखते हैं। इसे नासूर का बाहरी मुख के नाम से जाना जाता हैं।

नासूर पुराणा होने से पहले, उसका मार्ग पक्का होने से पहले सिर्फ फोड़ा के स्थिति में ही उसका पूरा का पूरा डॉक्टरी इलाज होना जरुरी हैं। यानि आगे आनेवाली बड़ी शल्य चिकित्सा को रोका जा सखता है।


नासूर पे उपाय यानि ऑपरेशन जो काफी उलज़नोवाला रहता हैं। उसकेलिये कुछ दिन हॉस्पिटल में ही रहना पड़ता हैं और घाव को ड्रेसिंग करवाना पड़ता हैं। बल्कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने आयुर्वेद में शुश्रुत ने बताये गए क्षारसूत्र चिकित्सा का शास्त्रिय अनुसंधान किया हैं। ये क्षारसूत्र मतलब आयुर्वेदिक औषदो से भिगोया हुआ धागा होता है, जो नासूर के मार्ग में बुनना होता हैं। यह धागा नासूर का रास्ता काटता जाता हैं और घाव भरता जाता हैं। यह धागा हर हप्ते में एक बार अदला बदल किया जाता हैं। रोगी अपना रोज का कार्य कर सकता हैं,और हॉस्पिटल में दाखिल होने के भी जरुरत नहीं होती है।


क्षारसूत्र में पूरा इलाज मुमकीन है। पर शुरू के समय में घाव ठीक होने में समय लग सकता हैं। ऑपरेशन करवाना हैं तो हॉस्पिटल में रहना पड़ता हैं, पर क्षारसूत्र यह उपाय आउट पेशेंट कक्ष में भी करवाया जा सकता हैं। आयुर्वेद में यह उपाय हैं फिर भी विज्ञापनदाता डॉक्टर के पास जाने के आलावा कोई जानकार डॉक्टर से ही उपाय कराये।