बवासीर: Piles treatment in Hindi

हमारे गुदद्वार के अगल बागल कुछ भी समस्या होती हैं तो सबसे पहले हमारे मन मैं यही सवाल आता हैं की क्या ये बवासीर तो नहीं? इनफैक्ट बवासीर एक ऐसी बीमारी हैं जीसका प्रमाण बाकी बीमारी से भी अधिकतम होता हैं। आइये चलिए देखते हैं, हामारे शरीर के इस अंगो मैं होने वाले समस्या क्या हैं और इनका समाधान ।


अधिक प्रमाण में पाए जाने वाले गुद्द्वार मुद्दे।


कम प्रमाण में पाए जाने वाले गुद्द्वार मुद्दे।



उपर दि गयी हुई सभी बीमारिया एकदूसरे से अलग-अलग हैं। उनके लक्षण और उपाय अलग हैं। गुद्द्वार एक ऐसी जगह हैं जिसके सफाई के बारे मैं नज़र अंदाज़ किया जाता हैं और साथ ही साथ इन जगहों पर होने वाली बीमारियो पे भी। असल मैं इसके बारे मैं शर्म महसूस होती हैं और, ऐसे बिमारियों पे गोपनीयता से उपचार किये जाते हैं। और इन्ही गोपनीयता के वजह से उपाय के जगह अपाय हो जाता हैं।


बवासीर होती क्यों हैं? और वो किसको होती हैं? उसकी प्रमाण क्या होती हैं? बवासीर से बचने के लिए क्या उपाय हैं? ये तीनो बीमारिया मैं से हमें बवासीर ही हुआ हैं क्या ये कैसे पहचाने। ऐसे अनगिनत प्रश्न हमारे मन मैं आते रहते हैं।


एक बार हमे स्वास्थ्य शिबिर मे पूछा गया की बवासीर बीमारी औरतो को भी होती हैं क्या? आधुनिक चिकित्सा की तरह बवासीर का प्रमाण महिलाओं मैं भी उतना ही होता हैं जीतना की मर्दों मैं होता हैं। बल्कि महिलाये अपने बाकी दुःखों की तरह ये दुःख भी छुपती रहती हैं। उसपे उपाय करने के लिए आगे नहीं बढती, इसी कारण Hospital के आकडो मैं महिलाओ का प्रमाण कम होता हैं।


गुदा से गुदद्वार के मार्ग के (गुदामार्ग) त्वचा के नीचे की अशुद्ध रक्त वाहिकाओ बंडल वहा के नाजुक मांसपेशियों के आधार पे होते है। उनका कार्य कुशन जैसा आधार देने वाला होता है। अपने गुदद्वार के अंदर के और बहर के दबाव पे नियंत्रण रखना, इन बंडलों का स्थान निश्चित होता हैं जैसे की घडी के प्लेट मैं ३,७,और ११ होते हैं वैसे। ये प्राकृतिक शरीररचना का एक हिस्सा है। हमेशा शौच के दरमियान उनका प्रसारण होता है।


प्राकृतिक शरीर-रचनाओं से बने हुए ये कुछ अंग बहार क्यों आते हैं? उसमें से खून क्यों आता हैं? वाहाका जलन और इसका हमारे आहार से कुछ रिश्ता हैं क्या?


१. जिन लोगोंको कब्ज़ की बीमारी होती हैं।

२ जिनको शौच दरमियान जोर लगाना पड़ता हैं।

३. बुढ़ापे में जब लोग कमजोर होते है।


कब्ज के अनेक कारन हैं, जैसे की अन्न का सही तरीके से पाचन न होने से, आधा अधूरा पका हुआ खाना खानेसे। आहार मैं प्रोटीन की मात्रा काम होने से।


कब्ज वाले लोगोंक को शौच के समय ज्यादा pressure देना पड़ता हैं और उसी कारण गुदद्वार के अंदर का pressure बढ़ता हैं pressure बढ़ने से अशुद्ध खून के बंडल फूल जाते हैं और कुछ समय बाहर निकाले जाते हैं।


उम्र के द्वारा या बीमार लोगो के अंदर की शक्ति कम होती हैं। गुदद्वार के मार्ग के रक्त वाहिकाओं को पकड़ कर रखने वाले मांसपेशियों की भी शक्ति कम होती है। वो ढीली पड जाती हैं और वो गुदद्वार से बहार सरकती हैं। ये खुली पड़ी हुए, फूली हुए रक्त वाहिकाओ पे कब्ज के कारन कठीन हो गए शौच का दबाव पड़ता हैं। इस अतिरिक्त दबाव के वजह से वो फट सकती हैं। और इसीलिए कड़क शौच का मल गिरने के बाद रक्त कोष से ताजे खून की बुँदे गिरते हैं। कई बार अतिरिक्त दाबाव के वजह से खून की गांठ बनती हैं इस समय दर्द हो सकता हैं।



बवासीर के लक्षण


ज्यादा समय तक कब्ज की बीमारी, गुदद्वार से खून बहना, गुदद्वार पे खुजली,सूजन,रक्तवाहिकाओं पे दबाव के कारन गाठ पडना और दर्द होना।


हमें बवासीर या नासूर की पहचान करनी आती हैं? बेशक! बवासीर में दर्द कम और खून ज्यादा बेहता हैं। बलकि नासूर मैं बहोत सी वेदनाये ओर मवाद गिरना ऐसे लक्षण होते हैं।


बवासीर का निदान सिर्फ उंगलियोंके द्वारे की जाने वाले जाँच के सहारे नहीं होता हैं उसके लिए proctoscopy की आवशकता होती है।


बवासीर मरीज के द्वारे ली जानीवाली देखभाल-


  • पेट साफ रखना (इसबगोल उपयोग करें)

  • शौच के दरमियान दर्द ना होने के लिए एनाल्जेसिक ( वेदनाहरक) का उपयोग करे।

  • गरम पानी में नमक डालके, गुदद्वार उसमे डूबा के पंद्रह मिनट तक बैठे रहे।


असल मैं बवासीर होने से पहले बवासीर से बचने के लिए अपना पेट हमेशा साप रखे। अपने खाने मैं प्रोटीन बनाये रखे. खुद का स्वस्थ अच्छे रखे। योगा करे।


पहले बताए गए लक्षण मिलणे पर उसका उपाय करने के लिए न शर्माये। बवासीर मैं शुरू के समय मैं औषधि उपाय हो सकते हैं लेकिन ज्यादा खून बेहता है और ज्यादा दर्द होता है तो शल्य चिकित्सा करनी पड़ती है।