Arthritis: गठिया का अचूक इलाज हिंदी में



गठिया Arthritis क्या हैं, गठिया रोग क्या होता है और गठिया का अचूक इलाज क्या हैं? ऐसे अनगिनत प्रश्न हमारे मन मे उपस्थित होते हैं। चलिये विस्तार रूप में जानते हैं गठिया होता क्या है, जिसे English में Arthritis के नाम से जाना जाता है।


जैसे की जब जोड़ों का दर्द शुरू होता है, तो ऐसा महसूस होने लगता है कि व्यक्ति बूढ़ा हो रहा है। जिन आंदोलनों को आसानी से करने की आवश्यकता होती है वे दर्द का कारण बनते हैं। खड़े होने और चलने के दौरान घुटने और जोडो के बीचमे से आवाज आती है। जमीन पे से उठते और बैठते समय आवाज आती है। गठिया के कारन जोड़ो मैं दर्द और अकड़न पैदा होती हैं। पुरुषों के तुलना में महिलाओ में गठिया होने की अधिक सम्भावनाये होती हैं। सरल रूप में देखा जाये तो गठिया होने की उम्र 65 मानी जाती हैं , परंतू शायद ही कभी बच्चों में भी पाया जा सकता है।



गठिया के लक्षण क्या हैं?


गठिया और जोड़ों के दर्द में सामान्य लक्षण कुछ इस प्रकार के होते है।


  1. जोड़ो में असहनीय दर्द।

  2. अचानक से जोड़ो में अकड़न आ जाना।

  3. जोड़ो में, उंगलियों में सूजन आना।

  4. जॉइंट्स के गति में कठिनाई।

  5. लाली।



ऊपर दिए गए गठिया के लक्षणों में से कई लक्षण सामान्य तौर पर हर सुबह देखने को मिलते है।




गठिया क्या है और गाठीया के प्रकार

गाठिया के प्रमुख दो प्रकार है।

  1. रूमेटाइड आर्थराइटिस (rheumatoid arthritis).

  2. ऑस्टियोआर्थराइटिस (osteoarthritis).


गठिया रोग की पहचान कैसे करे? क्या ध्यान रखा जाना चाहिए ताकि जोड़ों का दर्द न हो?


1.रूमेटाइड आर्थराइटिस क्या है (Rheumatoid arthritis) : 3-5 % लोगों में लगभग 38 से 50 उम्र वाले लोगो मे दिखाई देता है। इसमे हात और पैरो के उँगलियों के जोड़ो में दर्द करता है और सूजन रहती है। जोड़ों की लोच कम हो जाती है। उसका अकार डेढ़ा होता है. और यह अकार हमेशा के लिए ऐसे ही रहता है। इस प्रकार के गठिया मे psycho-Immune-Nouro -(Axis) का नजदीकी सबंध होता है। इस Axis में Immune का ज्यादा सबंध रहता हैं। इस तरह के जोड़ों के दर्द के लिए आधुनिक चिकित्सा में दिए गए उपाय केवल जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने के लिए हैं। विभिन्न परीक्षण किए जाते हैं, केवल निदान के लिए, उपचार के लिए नही. यहां केवल स्टेरॉयड पर जोर दिया जाता है। यदि घुटने इस प्रकार के जोड़ों के दर्द में है, तो संयुक्त प्रतिस्थापन की सलाह दी जाती है।


2.ऑस्टियोआर्थराइटिस क्या है (Osteoarthritis): ऑस्टियोआर्थराइटिस यह एक सामान्य प्रकार का गठिया है, लेकिन यह 40 की उम्र के बाद अधिक आम है। यह ठंडी हवाओं के परिणामस्वरूप बढ़ता है। यह गुठनो और टखनो के जोड़ों को प्रभावित करता है, जिससे जोड़ों में सूजन होती है।


शरीर और शरीर क्रिया विज्ञान की दृष्टि से जोड़ों को जोड़ने वाली मांसपेशियाँ बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। मांसपेशियों का प्रभावी संकुचन संयुक्त में दो हड्डियों को एक दूसरे पर दबाव डाले बिना स्थानांतरित करने की अनुमति देता है। यदि ये मांसपेशियां कमजोर हैं, तो वे प्रभावी रूप से अनुबंध नहीं कर सकते हैं, और यदि संकुचन प्रभावी नहीं है, तो संयुक्त हड्डी में ऊपरी हड्डी निचली हड्डी के खिलाफ रगड़ता है, और बीच वाली हलकी सी पतली हड्डी घीस जाती है।

भूतपूर्व खिलाडीयों मी ये स्थिती बहुत तेजी से होती है। वो इसलिए, शरीर का पूरा भार इन जोड़ो पे होता है. ठंड के दिनों में जोड़ो का दर्द असहनीय होता है। उनकी संकुचन शक्ति अधिक घट जाती है। हालांकि उम्र के हिसाब से यह हड्डी की घीसन होती ही है। परंतू जोड़ो को जोड़ने वाले मांसपेशिया कमजोर हैं तो इस हड्डी की बहोत तेजी से घिसन होती हैं और मूवमेंट के समय पे काफी दर्द महसूस होता है।


ऑस्टियोआर्थराइटिस का इलाज- लोग वेदनाहरित और मलम लगाने के लिए शुरू करते है. और उसका परिणाम थोड़े समय के तक रहता है। डॉक्टर के पास आना जाना लगा रहता है. दौरान डॉक्टर के द्वारा दूसरी पेनकिलर्स दी जाती हैं, जोड़ो में इंजेक्शन और थोडी सी कसरत की सलाह दी जाती हैं। लेकिन टेबलेट्स (Tablets) के राहत के वजह से लोग गठिया की exercise को नजर अंदाज करते है। पर गठिया में व्यायाम की सही जरुरत हमारे मांसपेशियोंको होती है। गठिया का व्यायाम हमरे मांसपेशियों को मजबूत बनता है।


एक बार जोड़ो का दर्द शुरू हुआ तो दर्द वाले घुटनोंके साथ exercise करना बड़ा कठीन होता है। और गठिया में व्यायाम न होने के वजह से गठिया का दर्द दिन ही दिन बढ़ता जाता है।

गठिया का उपचार क्या है?


गठिया में परहेज क्या करे या गठिया के घरेलू उपचार क्या है। आम तौर पर देखा जाये तो गठिया के उपचार गाठिया के प्रकार Gathiya Ke symptoms पे निर्भर करता है। गठिया के दर्द से तुरंत राहत लेना याने गठिया के उपचार का मुख्या कार्य जोड़ो में दर्द को काम कराना। हर एक व्यक्ति को वही गठिया का उपाय काम करे यह संभव नहीं होता है। पर अचानक से गठिया का दर्द उठे और आपातकालीन समय में कुछ सामान्य तकनीकों का इस्तेमाल होता हैं जो की हीटिंग पैड या आइस पैक जॉइंट्स पे रखने से बड़ी राहत मिल सकती है। चलने के दौरान घुटनो पे पड़ने वाला दबाव काम करने के लिए वॉकर का इस्तेमाल करे.


गठिया के गंभीर मामले में डॉक्टर से गठिया के निदान के लिए सुझाव लेना ही फायदेमंद हो सकता है।

गठिया के लिए सर्जरी।


ऐसे देखा जाये तो गठिया के लिए सामान्य तौर पर एक ऐसा तरीका है, सर्जरी के जरिए उस विशेष जॉइंट्स को आर्टिफिशल से बदला जा सकता है. गठिया घुटनो और कुल्हो इन सब के लिए सबसे साधारण रिप्लेसमेंट है। जब गठिया पे कोई भी दवा या फिजियोथेरेपी का असर नहीं होता है तबतक आपके उंगलियों और कलाई के गंभीर गठिया के मामले में एक जॉइंट संलयन जहा आपके हड्डियों के सिरों पर रखा जाता है जब तक वे ठीक नहीं होते है।


यह तरीका सिर्फ सबसे गंभीर गठिया के मामले में ही किया जाता है।




गठिया के लिए व्यायाम (gatiya ki exercise kya hain)


गठिया क्या है ये तो जान लिया पर इसको काबू या गठिया को control में लाने के लिए गठिया के योगासन क्या है / गठिया के मुख्या और असरदार व्यायाम क्या हैं यह जानना भी उतनाही जरुरी है।


गठिया मे व्यायाम और कुछ योग प्रकार के मदत से हमारे जोड़ो के मांसपेशियों की मजबूती बनाये रखना ही सही उपाय और परहेज है। अगर गठिया का अचूक इलाज करना चाहते हे तो इसके लिए जवानी से ही इसको ध्यान में रखते हुए हररोज व्यायाम करना चाहिए।



आइए देखें कि सामान्य रूप से कूल्हे, घुटने और टखने के जोड़ों का समर्थन करने वाली मांसपेशियों को कैसे मजबूत किया जाए।


गठिया में कूल्हे के लिए व्यायाम - ताड़ासन


यह एक सरल व्यायाम प्रकार है। अपनी एड़ी और घुटनों को एक साथ बंद करके सीधे खड़े हो जाएं। फिर उसी समय दोनों हाथों को ऊपर उठाएं। हथेलियां एक दूसरे के करीब होनी चाहिए। दोनों हाथों मी अपने शरीर जाताना हि अंतर रखे। दोनों हाथों को अच्छे से पकड़ें और कानों के पास तक लाएं। दोनों हाथों की हथेलियों को सामने की ओर घुमाएँ। एड़ी को ऊपर उठाएं, पूरे शरीर को पंजों पर उठाएं और शरीर को ऊपर की ओर खींचें। चेहरे के सामने एक वस्तु पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। धीरे-धीरे एड़ी को नीचे लाएं, हाथों को सामने लाएं और उन्हें नीचे लाएं। यह सरल विधि रीढ़ में मामूली शिकायतों और दोषों को दूर करेगी।


पवन मुक्तासन- अपनी पीठ पर लेटो। शरीर के किनारे पर एक पैर को 30 कूल्हों के माध्यम से उठाकर दोहा हाथों को सीधा कारीये। फिर इसे एक गाँठ में तोड़कर छाती तक खींचें। घुटने को दोनों हाथों से छाती के पास पकड़ें। फिर धीरे-धीरे भुजाओं को शरीर के किनारे पर लाएं, पैर धीरे-धीरे सीधे करे और नीचे ले। बिलकुल वैसे हि दुसरे पैर को करे। फिर दोनों पैरों को कूल्हों से सीधा ऊपर उठाएं। दोनो पैरोंको हात से पकड़ के रखे फिर गर्दन को उठाके नाकसे घुटनों को स्पर्श करे. यह रीढ़ और रीढ़ की हड्डी का व्यायाम है।



गठिया में घुटनो का व्यायाम- वीरासन


घुटनो के दर्द से बचने के लिए वीरासन यह एक अच्छा, और सरल व्यायाम है। एक-एक करके दोनों पैरों को घुटनों के पास रखें। दोनों पैर आगे करके बैठें हालाँकि, बैठक पैरों पर नहीं होनी चाहिए। जमीन पर होनी चाहिए। रीढ़ सीधी होनी चाहिए। हाथों की हथेलियों को एक उल्टे योग मुद्रा में जांघों पर रखा जाना चाहिए। पूरा ध्यान श्वास पर होना चाहिए।


यह आसन न केवल घुटने के दर्द को कम करता है बल्कि एड़ी के दर्द को भी कम करता है, जो भोजन के तुरंत बाद किया जा सकता है। इससे पेट हलका होता है।



गठिया टखने का व्यायाम -पद्मासन


सतरंजी पर अपनी जांघों के साथ बैठो। दूसरे पैर की जांघ पर एक कदम रखें, फिर पहले की जांघ पर दूसरा पैर लें। दोनों घुटनों को जमीन पर टिका देना चाहिए। दोनों हाथ जांघों पर। सीधी गर्दन। कंधों को वापस खींचा जाना चाहिए।


पद्मासन रीढ़, घुटने और टखने के तीन जोड़ों के लिए उपयोगी है।



गठिया और आहार


गठिया में आहार क्या लेना चाहिए diet for Arthritis?


गठिया मे आहार का मेल बिठाना सेहत के लिए काफी फायदेमंद है, अगर हम अच्छी तरीकेसे गठिया क्या है और इसके लिए आहार (diets for Arthritis) क्या ले समज जाते है, तोह हम गठिया का अचूक इलाज अभिसे कर सकते है।


  1. सुबह उठते ही नींबू पानी पिने से अनेक फायदे है, सबसे आछा फायदा गठिया वाले मरीजों को होता हैं।

  2. गठिया में नाश्ते के समय उबला अंडा, अंडा ब्रेड, व्हीट डोसा, उपमा और एक गिलास दूध।

  3. लंच में दो रोटी, हरी सब्जिया, एक कप चावल, सलाद और अगर 50 ग्राम स्टीम्ड फिश लेंगे तो अधिक फायदे है।

  4. शाम के नाश्ते में नींबू पानी, दही, सलाद, काली चाय, पोहा , क्रीम निकले दूध के साथ थोड़े अक्रोड।

  5. रात के खाने में बिन्स की सब्जी, तीन रोटी, उपमा, और लौकी की सब्जी ले।