Best Fissure Treatment: symptoms & causes पुरी जाणकारी हिंदी मे

Sentinel Pile क्या होता हैं और वो किसको होता हैं? Sentinel Pile से बचने के लिये क्या करे? और अगर होता हैं तो क्या उपाय करे? Sentinel Pile मतलब हमारे गुदद्वार के त्वचा एवम अंदर के त्वचा को पडने वाले दरार। Sentinel Pile किसी को भी हो सखाते हैं इसाकी कोई विशिष्ट उम्र नाही होती हैं। इसका प्रमाण जवान और मध्यम आयु के लोगो में दिखता हैं। गुदद्वार और गुदमार्ग के नाजूक त्वचा को / अंदर कि त्वचा को चोट पडने पे दारारे आती हैं।


Fissure के कारण:

  • कब्ज या कठीण मल का बडा हिस्सा जोर लगाकर बाहर निकालने पे होणे वाले जखम।

  • जुलाब होणे पर गुदामार्ग से मल बाहर गिरने की प्रक्रिया बारबार होणे के वाजह से, वह अंग सुखा पड जाता हैं और दारारे आती हैं।

  • गर्भावस्था मे अखिर के ३ महीनो मे गर्भाशय का पुरा भार गुदा पे होता हैं, इसीलिये मल आगे सरकने मे कठीणाईया बढती है, और कब्ज होके Sentinel Pile का कारण बनता हैं। अपने बच्चे के सुख मे महिलाये इस दुःख को भूल जाती हैं और नज़रअंदाज करती है। बहुत सारे महीने बीतने के बाद यह मुसीबत (बिमारी) अधिक दुःख देती है।

  • पेट साफ होने वाले दवाइया (tablet) पे निर्भर रहने के वजहसे भी Sentinel Pile का निर्माण होता है। शायद ही कभी पुरुषों में समलैंगिक संभोग एवम महिलाओने गुद्दामार्ग से सम्बन्ध रखने से भी त्वचा को चोट पहुंचने के वजह से दरारे आती हैं (Sentinel Pile)।


सही में तो Acute Fissure (तीव्र विदर) आके थोडे दिनों मे ठीक भी हो जाते है। पर कई बार पुराने हो जाते है (Chronic Fissure)। क्योंकी तीव्र मोड मे बहुत दर्द होता है। शौच के समय यह दर्द असहनीय होता है।


इस वजह से गुदामार्ग के अंदर की पकड तंग बंद होती है, और वो मिट जाने के वजह से कब्ज का प्रमाण अधिकतम बढता है। और फिरसे शौच के समय कठीन मल का हिस्सा दरारों पे घिसने के वजह से बार बार चोटे आती हे और दरारे अधिक बड़ी होती है। कब्ज़ या कई और कारन दरार, दर्द, गुदामार्ग की तंगी, कठीन मल बहार निकलते समय बार बार चोट आना और पुरानी दरारे बड़ी होना- ऐसे कई दर्दनाक दुष्चक्र शुरु होता है।


अंकुर (Fissure) का प्रमाण पुरुष वर्ग मैं ज्यादा पाया जाता है, और सामान्य रूप में गुदद्वार घडी के थाली के जैसे देखा जाये तो ६ के स्थान पे - यानि पीछे के बाजु अंकुर आते है। और गर्भावस्था में महिलाओंको जो अंकुर आते है वो १२ के स्थान पे होते है-यानि आगे के तरफ होते है।


तीव्र (acute fissure) होता हैं तब दरारे अधिक गहरी होती है, दर्द होता है, परन्तु उस जगह पे सूजन नहीं रहती। उधर का हिस्सा कठीन नही होता हैं, और एकबार कब्ज ठीक होजाने पे वेदनाहर मलहम का इस्तमाल करने पे अंकुर अपने आप ठीक हो जाते है।


पुराने अंकुर (Chronic Fissure) लम्बे समय तक ठीक न होने पर उस जगह पर हमें कुछ बदलाव नजर आते है। और वो ये है....

  • गुदामार्ग में बहोत दिन से दरार वेसे ही रहने के वजह से, पुराणी दरारे कठोर होती हैं और वहा पे सूजन आती हे।

  • दरार के बाहरी बाजू मे यानि गुदा के अगल बगल त्वचा के अंकुर बनते हैं और उस जगह पे लटकते है।

  • हात लगाने पर किसी अनाज के अंकुर जैसा महसूस होता हैं।

  • अंकुर के दरार को संक्रमण होकर वहा पे फोड़ा अता हैं।

  • यह फोड़ा ज्यादा समय रहने पर नासूर होता है।


Fissure (अंकुर) के लक्षण -

  • दर्द - ये सबसे स्थायी या कई बार fissure का एकमेव मात्र ऐसा लक्षण हो सकता है।

  • खून बेहना- मल को चिपक के खून की एक लाइन दिखती हैं, सामान्य रूप में बवासीर में जैसे खून की बुँदे गिरती हैं, वैसे नहीं गीरती। या फुहारे नहीं उठते हैं।

  • सूजन - ये गुदद्वार के आये हुए त्वचा के बण्डल या फोड़ा के वजह से होती हैं।



Fissure में ऑपरेशन की जरुरत कब नहीं रहती है?

fissure की बीमारी जब नयी रहती हैं, दरारे ज्यादा गहरी नहीं होती है, और गुदद्वार की ज्यादा पकड़ नहीं होती है तब ऑपरेशन करने की कोई आवश्यकता नही होती है।


Fissure के उपाय / इलाज -


  • कब्ज़ होने से रोके।

  • गुदद्वार के अंदर के मांसपेशियाँ ढीली करने के लिए दवाई ले।

  • एनाल्जेसिक (वेदनाहारक) मलहम का उपयोग करे।

  • गुनगुने पानी में नमक डालके उसमे गुदद्वार रखके १५-२० मिनट बैठे रहे इससे सूजन कम होगी और सात ही साथ दर्द भी।


ऑपरेशन कब करना चाहिए?

  1. पुराने ठीक न होने वाले अंकुर रहने पर।

  2. गुदद्वार के पास त्वचा के अंकुर लटकते होंगे तो।

  3. गुदद्वार की मांसपेशिया,अत्यधिक कसी होगी तो।

  4. सूजन या संक्रमण होने पर।


उपरी दीये गये लक्षण और गुदद्वार की उंगलियों के द्वारा की गयी जाँच, तदनुसार आधुनिक दवा की तरह उपाय करे. शुरू में दवाओं से उपचार करें। अंकुर (fissure) पुराने हो या दर्द ज्यादा हो तब ऑपरेशन करना पड़ता है।

अंकुर(Fissure) पर आयुर्वेदि पंचकर्म चिकिस्ता रोगनिवारक रहता हैं।बेशक वो विशेषज्ञता द्वारा करे।


गणेशमुद्रा ये योग प्रकार रामबाण करके सुझाव दिया जाता हैं।